म्हारों निमाड़ ‘खण्डवा’

खंडवा शहर

हंवू नमन करू ई भक्ता ख$
बड़ी दूर सी पैदल अई न
हरि दर्शन ऊं कर$
जहां भमसार$ सी राेज सबेरे काेयल कर$ रे उजालाे याें खंडवा नगर छे हमाराे —–
माखनलाल दादाजी की या नगरी छें साहित्यिक की *
रामनारायण दादाजी की
संस्कार ई संस्कृति की
लाेक निमाड़ी की छवि जिनकी
जहां इनकाे नावज चल$ —
याें लाेक निमाड़ अलबेलाे
यहां साहित्यिक काे ढेराे
याे खंडवा शहर है मेराे
हिंदू मुस्लिम सिख.ईसाई
हर धरम का लाेग छें भाई
मंदिर मस्जिद और गुरुद्वारा
हर धरम का पुजण वाला
असा धरम की प्रीत बढावण वाला
हर शक्ति ख ताे मनाव$
दादजी काे मान बढाव$
किशोर दा काे जन्म यहाँ काे
भारत को ताे ऊँ ताराे थाे
खंडवा नगर काे ऊँ वीराे थाे
वीर बहादुर गीत सुणाव$
खंडवा काे नावज चल$
ओमकारेश्वर काे घाट यहाँ पर
त्रिवेणी काे पाट यहाँ पर
सिंगाजी की सांख यहाँ छें ब्रह्म गीर काे जहाँ ठांट छें
ममलेश्वर काे वास यहाँ छें
यहां नर्मदामाई रहेय$ —–
याँ उनकी ममता बाेल$
तुम भजन कराे रे भाई
खंडवा की लीला प्यारी —–
जहां डाल डाल पर राेज सबेरे काेयल कर$ रे उजालाे याे
खंडवा शहर छें बड़ो बड़ो प्यारो

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श्रीमती अनुराधा सांडले खंडवा
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