अंजुरी – घनाक्षरी

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अंजुरी में भर स्नेह,
लागी श्याम संग नेह,
दधि माखन मिश्री से,
कान्हा को रिझाए रही।

मन में बसे मुरारी,
गोवर्धन गिरधारी
चरण धूलि पाकर,
आनंद पाए रही।

चहक रही चांदनी,
महक रही यामिनी,
अंजुरी में चांद भर,
मन मुस्काए रही।

गोपियन वृंदावन,
राधारानी मधुवन,
कृष्ण की मुरली सुन,
रास रचाए रही।

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About ममता कानुनगो 7 Articles
मैं ममता कानुनगो इंदौर से सभी को नमन! मै एक गृहिणी हूं। शिक्षा-एम.ए एवं शास्त्रीय गायन में विशारद हूं।लेखन और गायन में मेरी बचपन से रुचि है।
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