अपराजिता

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मेरा जीवन है,
हिरनी जैसा
उन्मुक्त भरती कुलाँचे,
बन-बन भटकती रही,
हारी हूँ ना अभी,
आगे भी ना हारूँगी।
में नारी भारत की,
कर्मठ,कठोर ,
प्रतिज्ञाओं की पूर्णता हेतु,
परीक्षा दे,तारामती भी,
अपराजिता बन,
गौरवगाथा बन
नारी मान बढा़या।
पीकर गरल को ,
मीरा ने कृष्ण को पी बनाकर,
अपराजिता बनी।
बंधनों में ना जकड़ों,
संसार की जन्मदायिनी,
माँ को, जिसनें ना की है, परवाह ,
अपने तन की, दायित्व पूर्ण करती,
ह्रदय पर रख पत्थर, दबा कर,
प्यार सीने में,
भेज दिया है,लाल को,
सरहदों पर, अपनें दुश्मनों की.
संगीनों के सामने,
हार ना है,स्वीकार इसको,
अपराजिता थी,
अपराजिता है,
अपराजिता रहेगी।

स्वरचित✍
सुषमा शर्मा इन्दौर🙏

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About सुषमा शर्मा 6 Articles
श्रीमती सुषमा शर्मा, इंदौर शिक्षा: ओल्ड, जी, डी, सी कॉलेज से स्नातकोत्तर। विधा: लघुकथा लेखन, कहानी, संस्मरण ,कविता आदि, समाचार पत्र में कविता प्रकाशित उपलब्धि: आकाशवाणी भोपाल से 20 वर्ष मालवी लोक गीत गाए व 10 वर्ष तक अवधी भाषा में भी गाए व कई पुरस्कार प्राप्त किए व मंच पर भी कई कार्यक्रम भी दिए। सिलाई -प्रशिक्षण से डिप्लोमा कर, बी.एच.इ .एल .भोपाल की ( वेलफेयर विंग संस्था) में गरीब बच्चों के लिए कपड़े सिल कर बच्चों में निशुल्क बाँटे । मेरी रूचि:संगीत व गायन व साहित्य से भी बहुत लगाव है। अध्यात्म से लगाव है।
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