आईना


आज सोचा उससे कुछ बातें
कर लूं खास
मैं गई उसके पास
उस पर जमीं धूल की गर्त
करने लगी साफ
परत हटते ही वह मुस्काया
कितने दशक बाद मैं याद आया
भूल गई हो तुम ,कितना मुझसे
बतियाती थी
सज संवर कर किस तरह तुम
इठलाती थी
मैं खोई खुद में ,नि:शब्द सी
उसमें अपना अक्स देख रही थी
चेहरे पर कुछ बारीक लकीरें
अधपके बालों को देख रही थी
क्या यह मैं हूं , हां मैं ही तो हूं
टकटकी लगाये सोच रही थी
इस तरह क्यों देख रही हो
उसने चुप्पी तोड़ी
तुम भी वही हो ,मै भी वहीं हूँ
सच तो है यह , मैं सच्चाई
दिखाता हूं
तुम उसे स्वीकार नहीं कर
पा रही हो
कैसे कहती उससे कि जीवन
की आपा-धापी में चंद लम्हे
न उसके साथ बिता पाई
वह बोला , उदास न होना
जो बना है उसे बिगड़ना भी है
मुझे भी टूटना है ,तुम्हे भी
बिखरना है ।
नन्ही परी से लेकर आज तक
का सफर , यही जीवन का
सच है
क्योंकि ………………
आईना कभी झूठ नहीं बोलता

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About जागृति डोंगरे 11 Articles
मैं जागृति श्यामविलास डोंगरे मंडलेश्वर से . पिता --- महादेव प्रसाद चतुर्वेदी माध्या (साहित्यकार) हिन्दी, अंग्रेजी, निमाड़ी मंडलेश्वर शिक्षा --- M. A. हिन्दी साहित्य मैं स्कूल समय से कविताएं लिखती रही हूं , काफी लम्बे समय से लेखन कार्य छूट गया था, अब पुनः शुरू कर दिया । इसके अलावा अच्छी,अच्छी किताबें पढ़ना , कुकिंग का भी शौक है। रंगोली बनाना अच्छा लगता है। कढ़ाई , बुनाई भी बहुत की,अब नहीं करती।
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Gurupreet kaur
Gurupreet kaur
10 months ago

Very nice Auntyji all d best for new article