आज कुछ अलग हो

आज कुछ अलग हो

आज कोई काम हाथ में मत लो।

बरामदे में रखी कुर्सी पर बैठो, और लकड़ी की मेज़ पर पैर फैला लो,
और तब तक बैठो जब तक, बाहर से आती हुई हल्की मीठी धूप ,
तुम्हारे अंगूठो को छूने लगे और थोड़ा गरम कर दे।

देखो सड़क पे जाते हुई भीड़ और गाड़ियों को,
हर कोई एक कहानी लेकर भाग रहा है।
तुम बैठो, तुम्हारी भी कुछ कहानियाँ रही होंगी।

यादोँ के एल्बम में सहेजी हुई एक कहानी निकालो,
थोड़ा धूल झटक कर , मुड़े हुए कोने ठीक करो।

टटोलो थोड़ा मन को और चाय के साथ फिर जियो उस कहानी को।
क्या हुआ, क्या होना था, क्या खोया और क्या पाया,
कहानियाँ ख़त्म हो कर भी अमर रहती है,

जैसे रंग आपस में घुलकर एक नया रंग बना लेते है वैसे
हर कहानी धीरे धीरे एक लंबी कहानी का हिस्सा बन जाती है

तो आज,
आज कोई काम हाथ में मत लो

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Photo by Alisa Anton on Unsplash

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About सुषमा चौरे 7 Articles
मैं सुषमा चौरे इंदौर से, शिक्षा राजनीति शास्त्र में एम ए किया है। देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी से योग डिप्लोमा । 25 साल शिक्षण कार्य किया है। साहित्य में रुचि है पढ़ने और लिखने का शौक है। नियम नहीं जानती को मन में आता है लिख लेती हूं।
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