आत्म मंथन

mandala

अहं स्वयं का टूटने दो
अंतर्रुदन फूटने दो
आप ही तब होगा रचित
महाकाव्य उद्घाटित।

जीवन की सारी आशाएं
टूटे तो टूटने दो
और मन के कोध का
श्वास घुटे तो घुटने दो
आप ही तब होगा रचित
महाकाव्य उद्घाटित।

मन की ज्वाला शांत हो
और स्नायू आक्रांत हों
विचार तथा संभ्रांत हों
न मन में विप्लव प्रान्त हो
आप ही तब होगा रचित
महा काव्य उद्घाटित।

समय बन तोड़ दो
अधिक विचार छोड़ दो
प्रथा रूढ़ियां तोड दो
तथा संकोच मरोड़ यो
आप ही तब होगा रचित
महाकाव्य उद्घाटित।

अन्याय का अंत हो
मधुर स्वयं का कंठ हो
परस्परावलंब अनन्त हो
अंत दुख का तुरन्त हो
आप ही तब होगा रचित
महाकाव्य उद्घाटित।

सत्यता का प्रमाण हो
तब आत्मत्राण हो
बंधुत्व का निर्माण हो
प्राप्त स्वयं को निर्वाण हो
आप ही तब होगा रचित
महाकाव्य उद्घाटित।

image by sangeeta barve

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About अंशुमान सिंह ठाकुर 3 Articles
मेरा नाम अंशुमान सिंह ठाकुर है। मैं राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से संगणक अभियांत्रिकी में स्नातक हूं। यूं तो मेरी बहुत सारी चीज़ों में रुचियां हैं परन्तु मुझे लेखन एवं चित्रकला में सबसे अधिक रुचि है। राजनीति, अर्थव्यवस्था तथा धर्म में भी कुछ दिलचस्पी है।
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