गुड़िया की शादी – बाल साहित्य

गुड़िया की शादी

शीर्षक: गुड़िया की शादी

क ख ग घ नाच रहे है
झ झाड़ी में उलझ गया है,
अ ब स को कौन बुलाये,,,
ढ से ढोल को कोई समझाओ
ग से गान बिना ही बजता,,,
म से मोटर गाड़ी आई
स से सेहरा गुम ही गया है,,,,
द से दरवाजे पर आई,,,
इस बरात का क्या ही कहना,,,,
ल से लड्डू गुड्डा खाये
गुड़िया रानी है उपास पर
खलल बलल सब हुए घराती,,,,,
वर माला गुड़िया जब लाई,,,,
सब की चिंता सर माथे पर,,,,
कोई बराती रूठ न जाये,,,,,,
खुशबू नए नए व्यंजन की,,,,,,
घूँघट में गुड़िया को आती,,,,,,,
तभी सखी चुपके से आई,,,,
बिंदी ठीक करन के बहाने,,,,,
एक हाथ घूँघट में आया,,,,,
उसमे मोतीचूर का लड्डू,,,,,,
छुपम छुपाई खेल रहा था,,,,,
अब गुड़िया का पेट भरा था,,,,,,
सखी काम ऐसे आती है,,,,,
गुड़िया नाचे गुड्डा नाचे
आसमान से फूल बरसते,,,,

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Image by Albrecht Fietz from Pixabay

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About माया कौल 13 Articles
एम ए एल एल बी अध्यक्ष तक्षशिला महिला ग्रामोत्थान समिति अध्यक्ष भूतपूर्व सैनिक परिषद(मातृशक्ति) मालवा प्रान्त जनरल सेकेट्री भूतपूर्व सैनिक परिषद(मातृशक्ति) दिल्ली कौंसलसर, वन स्टॉप सेंटर महिला बाल विकास मास्टर ट्रेनर सेफ सिटी इंदौर गद्य पद्य लेखन में रुचि, संस्कृति साहित्य मंच द्वारा गणतंत्र सम्मान, दीपशिखा सम्मान एवं सृजन साधना सम्मान मिला है।
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विभा गावशिंदे
विभा गावशिंदे
3 months ago

बहुत सुन्दर कविता