त्याग

त्याग

एक लौ,
दूसरी लौ को रोशन गई…..
एक लौ,
दूसरी लौ को रोशन गई…..
वो बुझी,
वो बुझी,,, और उसको रोशन कर गई।
ये त्याग देख कर भी कोई समझ न पाए,
ये त्याग देख कर भी,
कोई समझ न पाए…..
जो छोटी सी हो कर भी,
पूरा घर भर गई,
जो छोटी सी होकर भी पूरा घर भर गई।

एक लौ,
दूसरी लौ को रोशन कर गई।
कुछ कर गई ऐसा,
कुछ कर गई ऐसा,,,
चार दीवारों को भी रंगो से भर गई।
बन कर उड़ गई वो धुआं,
बन कर,,,उड़ गई वो धुआं…..
उसकी चमक ने मेरी आंखों को तो छुआ।
उसकी एक चमक,
उसकी एक चमक,,, मेरे होठों को मुस्कान से भर गई।

एक लौ,
दूसरी लौ को रोशन कर गई।
बुझते ही वो एक सीख दे गई!
“जल कर तुझे भी बुझाना है ज्यादा मत इतरा,
वक्त–वक्त पर ही जलना है”
जल कर वो भी बोली!
“ये रीत तो सबको निभानी है फिर किस बात की परेशानी है।”

Image by Tanuj Handa from Pixabay

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About वाणी गुप्ता 5 Articles
वाणी गुप्ता, उरई, उत्तर प्रदेश शिक्षा - ड्राइंग एंड पेंटिंग (इंदौर), बैच 2018 रुचि - ड्रॉइंग, पेंटिंग, क्राफ्ट, कविता लेखन। वर्तमान कार्य - प्राइवेट ड्रॉइंग अध्यापिका
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Harshita Kaur Randhawa
Harshita Kaur Randhawa
1 month ago

It’s amazing 👏👏👏👏 you are very very talented masi 👍👍 how can I believe this in one person many talents are there 👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👍👌👌👌👌👌👌👌👌

Ragini Dwivedi
Ragini Dwivedi
1 month ago

Excellent dear really heart touching’nn