नयी सुबह

स्वप्न सा लगता है मुझको,
वो अच्छे दिनों का आना।
खोलते ही रीत जाता है,
खुशियों का हर खजाना।
विपत्तियाँ मुँह बाये खड़ी है,
जीवंतता अब एक कसौटी है।
तलवार की धार पर सच की,
प्रतिदिन ही लाखों चुनौती है।
हर एक साँस उधार की है,
जिजीविषा भी अब हार सी है।
पहरेदारी में साँसो की,
जिंदगी एक व्यापार सी है।
आशातीत हूँ लेकिन…
सूरज वो नयी सुबह लाएगा,
सबकी विपत्तियाँ मिटाएगा।
हर स्वप्न पर आँख मूंदकर मन,
आश्वस्त हो विश्वास कर पाएगा।

Photo by Aaron Burden on Unsplash

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About अनुराधा 'मोक्षदा' पारे 4 Articles
अनुराधा 'मोक्षदा' पारे , जबलपुर गृहस्वामिनी। शिक्षा: एम.एस.सी(जीवन-विज्ञान),इंदौर।
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