प्यार की खुशबू

छलका है मन उल्लसित,
प्रफुल्लित जीवन है बहता,
बढ़ते रहें कल कल नदी से,
देना सीखें हम नदी से-
आओ बिखेरें प्यार की खुशबू।

छोड़ के तेरा और मेरा,
क्षणिक जीवन फूलों सा महके,
खिलकर बिखरता प्रसून ये,
सीखें महकना फूलों से-
आओ बिखेरें प्यार की खुशबू।

रिश्तों के ताने बाने में,
उलझनों को हम सुलझाएँ,
प्यार लुटा ममता बाँटें हम,
सीखें प्यार बाँटना मॉं से-
आओ बिखेरें प्यार की खुशबू।

क्या ऊँच नीच,
क्या जात पात,
झूम झूम मधु बाँटे हम,
देता प्रसून धरती को बीज है,
सीखें सहनशीलता धरती से-
आओ बिखेरें प्यार की खुशबू।

Photo by Irina Iriser from Pexels

शेयर करें
About विभा भटोरे 9 Articles
श्रीमती विभा भटोरे, इंदौर स्नातकोत्तर -कार्बनिक रसायन शास्त्र (बी एड) अध्यन अध्यापन में विशेष रुचि। साहित्य सृजन का शौक है, निमाड़ी बोली संस्कृति और संस्कार के संरक्षण हेतु प्रयासरत।साझा संकलन शब्द समिधा प्रकाशित।
0 0 votes
लेख की रेटिंग
guest
0 टिप्पणियां
Inline Feedbacks
View all comments