खिलते बिखरते फूल

बगिया

फूल खिलके बिखर जाते हैं
बगिया को इस तरह सजाते हैं

अपने अस्तित्व को मिटा कर
भी बगिया को महकाते हैं

भंवरों की मनमानी सह
कर भी काटे नहीं चुभाते हैं

पराग अपना देकर मनचले
भंवरों की भूख मिटाते हैं

खूबसूरत फूल दूसरों को खुश
कर अपना अस्तित्व मिटाते हैं

मानव को फूल जीवन का पाठ
पढ़ाते हैं फूल सी जिंदगी जियो

अपनों के लिए अपना अस्तित्व मिटाते जाएंगे
बिखर के भी अपनी बगिया महकाएंगे

कहानियां भी पढ़ें – लघुकथा

Photo by Jeffrey Eisen on Unsplash

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About सरिता अजय साकल्ले 28 Articles
श्रीमती सरिता अजय जी साकल्ले इंदौर मध्य प्रदेश
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