बदलाव

वर्ष बदल गया , कैलेंडर बदल गया लेकिन क्या नहीं बदला? देखिए मेरी कविता “बदलाव” में


कैलेंडर बदल जाता है दीवार वही रहती है साल बदल जाता है लोग वही रहते हैं
हम बदल जाते हैं,
मां वही रहती है
कैलेंडर बदल जाता है दीवार वही रहती है
फूल बदल जाते हैं शाख वहीं रहती है
स्वप्न बदल जाते हैं नींद वही रहती है
सैलाब बदल जाता जाता है
नदी वही रहती है कैलेंडर बदल जाता है दीवार वही रहती है
रोटी बदल जाती है हाथ वही रहते हैं
स्वाद बदल जाता है,
भूख वही रहती है कैलेंडर बदल जाता है दीवार वही रहती है
भाव बदल जाते हैं, मन वही रहता है
भक्त बदल जाते हैं,
भगवान वही रहता है
तन बदल जाता है,
आत्मा वही रहती है कैलेंडर बदल जाता है दीवार वही रहती है
ऋतु बदल जाती है प्रकृति वही रहती है
तूफान बदल जाते हैं, हवा वही रहती है
सीप बदल जाती है,
रेत वही रहती है
कैलेंडर बदल जाता है दीवार वही रहती है

Photo by Chris Lawton on Unsplash

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About शांता गीते 3 Articles
शांता अशोक गीते (खंडवा) स्नातक और संस्कृत की कोविद तक की परीक्षाएं विशेष योग्यता से उत्तीर्ण सेवा निवृत्त शिक्षिका , साहित्य सृजन एवं निमाड़ी बोली और निमाड़ी संस्कृति के प्रचार प्रसार के लिए प्रयत्नशील, निमाड़ी में पुस्तक प्रकाशित "हिवड़ा की वात" मध्य प्रदेश सरकार की पत्रिका "चौमासा" में रचनाएं प्रकाशित आकाशवाणी इंदौर एवं खंडवा एवं भोपाल दूरदर्शन से रचनाओं का प्रसारण प्रगतिशील ट्रस्ट इंदौर द्वारा"नार्मदीय शिरोमणि अलंकरण" सुरभि साहित्य संस्कृति अकादमी खंडवा द्वारा सम्मानित "निमाड़ की मीरा"अलंकरण विश्व ब्राह्मण संघ द्वारा सम्मानित
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