बारिश

बारिश

बारिश की चंद बूंदें क्या गिरी,
मौसम खुशनुमा कर गई
मन मचल गया भीगकर
हर दिल जवां कर गई।


अँगड़ाईयां लेने लगी ख्वाहिशें,
सर्द मौसम की आड़ में।
मन के समन्दर में चलने को ,
यादों की कश्ती रवां कर गई।


सौंधी-सौंधी खुशबू महका गई जज्बातों को।
ठंडी हवा की सिहरन भी,
तन बदन में तूफ़ां कर गई।


अलसाये हुए ख्वाब जल उठे चिरागों से।
लफ्जों की महफ़िल सजाकर
शायराना जुबां कर गई….

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Image by S. Hermann & F. Richter from Pixabay

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About शालिनी बड़ोले "रेवा" 2 Articles
श्रीमती शालिनी पंकज बड़ोले शिक्षा- एमकॉम,एम.ए.(अर्थशास्त्र) एम.ए.(हिंदी साहित्य),शोधार्थी कवि, लेखक, लघुकथाकार लेखन-अंतराष्ट्रीय काव्य संकलन "आरम्भ उद्घोष" में रचनाएं प्रकाशित, अनेक लघुकथाएं पुरस्कृत, अहा जिंदगी, मधुरिमा, नईदुनिया, चैतन्य लोक आदि अखबारों में निरंतर प्रकाशन, स्टोरी मिरर में ऑथर आफ द वीक के लिए चयनित और प्रतिलिपि पर भी वेब सिरिज लेखन, शहीद भवन और रविन्द्र भवन भोपाल में मंच संचालन
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