बेटियां

ईश्वर प्रदत्त अनुपम उपहार
है बेटियां।
माता-पिता के दिल का अरमान
है बेटियां।
घर-आंगन की रौनक बढ़ाती
है बेटियां।
मां का साया, पिता का दुलार
है बेटियां।
हरसिंगार सी घर-आंगन महकाती
है बेटियां।
दर्द सहती और दर्द मिटाती
है बेटियां।
मां,बहन,बहू बनकर प्यार लुटाती
है बेटियां।
सारे जहां का दर्द सीने में समेटे
खामोश रह जाती
है बेटियां।
एक नहीं, दो-दो कुल की लाज
होती है बेटियां।
बेटी है तो कल है

Photo by Frank Holleman on Unsplash


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About जागृति डोंगरे 11 Articles
मैं जागृति श्यामविलास डोंगरे मंडलेश्वर से . पिता --- महादेव प्रसाद चतुर्वेदी माध्या (साहित्यकार) हिन्दी, अंग्रेजी, निमाड़ी मंडलेश्वर शिक्षा --- M. A. हिन्दी साहित्य मैं स्कूल समय से कविताएं लिखती रही हूं , काफी लम्बे समय से लेखन कार्य छूट गया था, अब पुनः शुरू कर दिया । इसके अलावा अच्छी,अच्छी किताबें पढ़ना , कुकिंग का भी शौक है। रंगोली बनाना अच्छा लगता है। कढ़ाई , बुनाई भी बहुत की,अब नहीं करती।
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संध्या गीते
संध्या गीते
1 year ago

बहत बढी़़या लघुकथा ।जैसे स्वयम की कहानी है।

वाणी
वाणी
1 year ago

अतिसुंदर।।।।