मन की बगिया

Photo by Gerrie van der Walt on Unsplash

मन की बगिया में
फूल खिले मुरझा गए
आँसुओं से सींचा
वो बह ही गए
बिखरना था जब यूँ
तो खिले क्यों थे
खिलकर यूँ बिखर गए
खिले मन को तोड़ गए
हुनर ना हम में था जो
टूटे मन को जोड़ दे
बगिया में फूल खिले
उन्हें सहेजकर रख लें
मन की बगिया में
फूल खिले मुरझा गए

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अनिता शुक्ला
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