वक्त

वक्त का पहिया सदियों से घूमता जा रहा
ठहरता ही नहीं चक्र चलता जा रहा

थम गया तो प्रलय आ जाएगा इंसान का
जहां से नामो निशान मिट जाएगा

ना सृष्टि होगी ना सूर्य समय
पर ना चंद्र निकल पाएगा

कर लो हर काज वक्त पर यह पल
गुजरा यह कभी लौट के ना आएगा

जाग जा मुसाफिर अब देर न कर
वक्त हाथों से निर बन फिसला जा रहा

Photo by Aron Visuals on Unsplash

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About सरिता अजय साकल्ले 28 Articles
श्रीमती सरिता अजय जी साकल्ले इंदौर मध्य प्रदेश
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