विधाता

विधाता की लीला अपरंपार

विधाता की लीला अपरंपार है कहीं खुशियां
तो कई गम हजार हैं

कहीं सूर्य की रोशनी तो कई घोर
अंधकार है

कहीं जन सैलाब का मेला तो कहीं होता
गमगीन इंसान अकेला
प्रभु तेरी लीला का यह कैसा अद्भुत
संसार है

कोई राजा तो कहीं रंक तो कही संतो की
लीला अपरंपार है

विधाता तेरी दुनिया में कहीं झूठ
कही फरेबी
तो कहीं इमानदार की होती नैया
पार है

कहीं कई कोसो नजर आता पानी तो कहीं
बंजर भूमि संसार है
विधाता तेरी दुनिया में कहीं पतझड़
तो कहीं सावन

कहीं बारिश तो कहीं सूखा अद्भुत तेरा
संसार है

विधाता तेरी दुनिया में लीला अपरंपार है

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Photo by Dave Hoefler on Unsplash

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About सरिता अजय साकल्ले 28 Articles
श्रीमती सरिता अजय जी साकल्ले इंदौर मध्य प्रदेश
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