शिशिर ऋतु

शिशिर ऋतु

शिशिर ऋतु जब आई,
प्रकृति की छटा निराली।

पत्तों पर शबनम की बूंदे,
मैदानों में धुन्ध है छाई।

गिरी पर है हिम की चादर,
थम गया नदियों का पानी |

ठंडी हुई पूस की रात,
पुआलों पर बैठ किसान ,

खेतों की करते रखवाली |
निर्धन अपनी मड़िया में .

गुदड़ी में देखो सिकुड़ा पड़ा
अलावों की बुझी रारव में |

देखो श्वान दुबक कर सोता
शहरों की सड़कें शून्य हुई अब, जो रहती सदा भीड़ भरी |

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Photo by Jagjit Singh on Unsplash

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About मनोरमा सकरगायें 3 Articles
नाम: मनोरमा सकरगायें जन्म स्थान: इन्दौर शिक्षा: एम ए ( हिन्दी साहित्य ) व्यवसाय : सेवानिवृत शिक्षक
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