सखी वसंत ऋतु आई

मेरा बसन्त
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सखी वसंत ऋतु आई
जग मऽ खुशहाल छाई
मन भावना ऋतु आई
सखी मन मऽ उमंग भरी लाई
सखी वसंत ऋतु आई
मोर नाच्या, कोयल कूकी
भवंरा न ताने सुणाई
ऋतुराज का स्वागत मऽ
गुन गुन करी नऽ
अलि नऽ विरदावली गाई
सखी वसंत – – – – –
डाळ – डाळ पऽ फूल फूले छे
भवंरा नऽ गुंजार मचाई
मोर नऽ देखो पंख फैलई न छतरी ताणी
कोयल न राग वसंत बहार सुणाई
सखी वसंत – – – –
कमल कमलिनी ताल मऽ फुल्या
शेवंती बगिया मऽ मुसकाई
फूल न का राजा गुलाब न
सारी बगिया महकाई
सखी वसंत – – – –
वरण-वरण का फूल फूली रयाज
बाग मऽ रौनक छाई
शीतल मंद पवन नऽ
देखो चारई दिशा गमकाई
सखी वसंत – – – –
पेळई-पेळई सरसों फूली
घहूं न की उम्बी लहराई
अमराई काअम्बा नऽ प
महूंड नऽ की छटा छे न्यारी
सखी वसंत – – – –
चारई दिशा न का
चारई कोना नऽ प
चारई तरफ
हरियाळी छाई
बननि मऽ बागनि मऽ
बगळ्यो बसंत छे
देखी न म्हारा मs उमंग भरी आई न
ऋतुराज का स्वागत मs
मs नs बी आज कविता बणाई
सखी वसंत ऋतु आई

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About शांता गीते 3 Articles
शांता अशोक गीते (खंडवा) स्नातक और संस्कृत की कोविद तक की परीक्षाएं विशेष योग्यता से उत्तीर्ण सेवा निवृत्त शिक्षिका , साहित्य सृजन एवं निमाड़ी बोली और निमाड़ी संस्कृति के प्रचार प्रसार के लिए प्रयत्नशील, निमाड़ी में पुस्तक प्रकाशित "हिवड़ा की वात" मध्य प्रदेश सरकार की पत्रिका "चौमासा" में रचनाएं प्रकाशित आकाशवाणी इंदौर एवं खंडवा एवं भोपाल दूरदर्शन से रचनाओं का प्रसारण प्रगतिशील ट्रस्ट इंदौर द्वारा"नार्मदीय शिरोमणि अलंकरण" सुरभि साहित्य संस्कृति अकादमी खंडवा द्वारा सम्मानित "निमाड़ की मीरा"अलंकरण विश्व ब्राह्मण संघ द्वारा सम्मानित
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