अब वक्त हमारा हैं

वक्त

अब ना कोई रोक टोक ना कोई बंदिश
अब जियो जी भरके क्योंकि अब वक्त हमारा हैं

बीत गए वो डरे सहमे से दिन
ना भय कोई ना कुछ साबित करने का दबाव
अब चाहे उड़ो गगन में या चलो जमीं पर ,जो चाहे कर लो अब वक्त हमारा हैं।

अब तक सुनी सबकी ना कही अपने मन की
अब भी सुनना हैं सबकी ,पर करना है बस अपने मन की
जो तकलीफें आयी जीवन में
वो न आती तो सुख का एहसास ही कहाँ होता ।
फिर भी मैंने खोने न दी अपनी मुस्कान अपना उत्साह,,,
अब ना कोई परीक्षा ना कुछ साबित करना बाकी
अब तो खुद को खुद से ही मिलवाने की हैं ठानी
कुछ सखियों का संचय किया तो
कुछ रिश्तों का सिंचन किया
जो लोग अब तक ना समझ पाये
उनको समझाने का निरर्थक प्रयास बंद किया,जो अब तक न
समझे आगे कहाँ समझ पायेंगे
छोड़ उन्हें आगे बढ़ना हैं उन
रिश्तों को सहेजना हैं जिनसे मिला अपार स्नेह और सम्मान
हर सखी ने साथ निभाया
हर रिश्ते ने प्यार बढ़ाया
पीछे मुड़कर देखा तो लगा
समय रेत की तरह हाथों से फिसल गया
पर वो गया ही कहाँ वह तो एक
सुंदर सपनों का महल बनकर मेरे सामने खड़ा मेरा स्वागत कर रहा हैं फिर क्यों ना मैं मुस्कुराऊँ

क्योंकि अब वक्त हमारा हैं।

Photo by Kunj Parekh on Unsplash

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About जयन्ती अखिलेश चतुर्वेदी 17 Articles
नाम--जयन्ती चतुर्वेदी निवास--सनावद , जिला खरगोन शिक्षा--बी एस सी, एम ए हिंदी साहित्य
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