क्या कहे बीता साल क्या ले गया

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किसी बूढ़ी आखों की उम्मीदें
किसी युवा की ख्वाइशें ।
क्या क्या नही ले गया।
कहने को पूरा साल था ,
लेकिन करने को कुछ नही किया।
छोटे छोटे नन्हे प्यारे प्यारे बच्चो की शरारतें ले गया
स्कूल के सुने गलियारे दे गया
किसी की रोटी छिनी
किसी की बेटी छीनी
किसी की ममता सो गई ,
तो किसी का पूरा घर आंगन ही सुना कर गया।
कम पड़ गई दो गज जमीन भी।
मानवता को भी दफन कर गया
कैसे बताए बिता साल क्या ले गया
त्योहारों की खुशियां बाजारों की रौनक ले गया।
किसी बहन की राखी सुनी हुई
तो किसी पत्नी का सुहाग गया।
कैसे बताए बीता साल क्या ले गया।
लेने के साथ साथ दे गया अकेले रहने की सीख
मुहँ छुपा छुपा कर रहना
रिश्ते नाते कुछ नहीं
मास्क ओर सेनिटाइजर से नाता जोड़ गया
एक से पीछा छुटा नही दूसरे को पीछे छोड़ गया
20 तो 20 था अब 21 तो 21 ही रहेगा
दो फिट की दूरी बरकरार है बहनों परिवार को समेटने की सीख दे गया ।

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About प्रभा प्रदीप चौरे 2 Articles
प्रभा प्रदीप चौरे, खंडवा
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