भरोसा

खुद के भरोसे

चल पड़े थे सुनसान राहों पर ,
जहां अंधेरों ने ही घेरा था
उजियारे की कोई उम्मीद न थी
एक भरोसा खुद पर था
उसी भरोसे के सहारे चले जा रहे थे
एक उम्मीद मन में लिए जा रहे थे
पर उस उम्मीद पर भरोसा न था
एक उजाले की किरण दिखाई दी
पर उस किरण पर भरोसा न था
जिंदगी में मिला धोखा इतना
अब खुद के भरोसे पर भरोसा न था
चल पड़े सुनसान राहों पर अकेले
कब थक हार बैठ जाएं कदम भी
अब खुद के चलने पर भरोसा न था ,
अब तो खुद के भरोसे पर भरोसा न था |

Photo by marcos mayer on Unsplash

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अनिता शुक्ला
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