हंसी – एक रामबाण औषधि

हंसी

रोते इस जहां मैं आए और
रुला कर सबको जाना है
इस बीच की जिंदगी को
हंस के गुजारना है

हंसी लबों पे आए जो देखे
खुद कुछ पल के लिए सब कूछ
भूल जाए जो देखे दुनिया उसे
हंसता देख अपने गम भूल जाए

अपने लबों की हंसी से
दूसरों के चेहरे खिल जाते हैं
रामबाण औषधि है हंसी हंसते
चेहरे हर निगाह में समा जाते हैं

दूसरों को हंसता देख हम
अपने गम भूल जाते हैं हम
जो हंसे कुछ पल हमारे अपने
हमें देख वे अपने गम भूल जाते हैं

हंसकर बिताए पल जीवन
बूटी का काम कर जाते
तन्हाई के आलम में भी
हम उन पलों को याद कर
तनहाई में भी मुस्कुराते हैं

अपने लबों की हंसी अपनों
के जख्मों की दवा बन जाती
है विपरीत परिस्थिति में भी
हंसी सबल बन नजर आती है

हंस कर अपनी जिंदगी के
फैसले लिए जाते हैं अपनों
के बीच फासले हंसकर ही
दूर किए जाते हैं

गम हर जिंदगी में खुशी का
दूसरा पहलू नाम लिएआते हैं
गम ही जिंदगी में खुशी का
एहसास कराते हैं

सुख-दुख जिंदगी के दो किनारे
हैं हंसकर ही जीवन की नैया
पार लगाई जाती है हंसी एक
जीवदायनी औषधि है जिंदगी
को खुशहाल बनाती है

Photo by Aman Shrivastava on Unsplash

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About सरिता अजय साकल्ले 28 Articles
श्रीमती सरिता अजय जी साकल्ले इंदौर मध्य प्रदेश
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