जीवन (जी-वन)

हमारा जीवन उस वन की तरह है।
जिसमे सब कुछ है हरा-भरा
लेकिन फिर भी है सुनसान और अकेला ||
जिसके एक पल चमकती धूप,
तो अगले पल घना अंधेरा।
जिसके एक पल चहचहाते पक्षी,
तो अगले पल ख़ामोशी के बादल ॥
भागते दौड़ते है पशु,
तो नाचती है हर डाली।
है खामोश शमा, जो ख़ामोशी से डरता है,
उसी में जीना है या हार कर मर जाना है ।।
कभी आंधी और तूफान में बह जाना है,
तो कभी बारिश की बूंद में भीग जाना है।
कभी रहों में चल कर चट्टानों से टकराना है,
तो कभी कांटो पर चल कर जाना है ।।
सब कुछ होकर भी,
खुद को अकेला ही पाना है।
भटक गया कभी कोइ राही,
उसको भी राह दिखाना हैं।
इसी “वन” मे हम सबको “जी कर दिखाना है।
इसे ही अपना “जीवन” बनाना है ।

Photo by Jill Heyer on Unsplash

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About वाणी गुप्ता 5 Articles
वाणी गुप्ता, उरई, उत्तर प्रदेश शिक्षा - ड्राइंग एंड पेंटिंग (इंदौर), बैच 2018 रुचि - ड्रॉइंग, पेंटिंग, क्राफ्ट, कविता लेखन। वर्तमान कार्य - प्राइवेट ड्रॉइंग अध्यापिका
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वाणी
वाणी
7 months ago

बहुत आभार आपका मेरे द्वारा लिखी कविता को अपने इस तरह से प्रस्तुत किया, यह कार्य ऐसे ही अपंगे चलता रहे और सभी इसी बहाने हिंदी मातृ भाषा से जुड़े रहे ।
धन्यवाद्।

Rammani
7 months ago

Amazing vanee gupta