जीवनसाथी

jeevansathi

मैं से हम बनने का प्यारा सफर
जिसके शब्द मे ही जीवन है और
जीवन की सम्पूर्णता भी इसी से है
यही है वो रिश्ता जीवनसाथी का।
जीवन की भोर से जीवन की साँझ तक जो साथ निभाये
धूप हो या छाँव जो कभी
न छोड़े साथ ,
एक नहीं कई जन्मों तक जो
निभाये साथ वही तो है जीवनसाथी…
ये नहीं कोई एक रिश्ता ये तो
रिश्तों का सुन्दर सा गुलदस्ता है।
हर रिश्ता नहीं होता सदा साथ तभी तो हर रिश्ते को इसी
में पाया हैं ।
बिना बोले जब एक दूसरे के दिल की बात समझ आने लगे
हर मुश्किल जिसके साथ सरल लगने लगे
कुछ पल का बिछौह भी जब दर्द
देने लगे तब ये बन जाता हैं अटूट
रिश्ता जीवनसाथी का।
यूं ही नहीं फलता फूलता ये रिश्ता
विश्वास का बीज बोना पड़ता हैं
समर्पण की खाद और हरदिन
प्यार से सींचना पड़ता हैं।
भूलकर भी अविश्वास का
कीड़ा न लगने पाये इसे ।
बहुत सहेजकर रखें इसे
निश्छल प्रेम की धारा में
बहने दे इसे ।
छोटी-छोटी नोंक छोंक इस
रिश्ते का सौंदर्य है ।
पर अपने अहंकार से न टूटने
दे कभी इसे ।
अतीत में नहीं वर्तमान में ही जिऐं
राधाकृष्ण की तरह प्रेम करे
शिवपार्वती की तरह एक दूसरे
का सम्मान करे ।

Photo by Ryan Holloway on Unsplash

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About जयन्ती अखिलेश चतुर्वेदी 17 Articles
नाम--जयन्ती चतुर्वेदी निवास--सनावद , जिला खरगोन शिक्षा--बी एस सी, एम ए हिंदी साहित्य
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