ख्वाहिश

khwahish

ख्वाहिशों की गठरी सिर पर उठा
चली मैं मंजिल की तलाश में यूं
राह बड़ी लंबी, पथरीली सी थी
बड़ा कठिन था, हर कदम बढ़ाना
गठरी कुछ खुलती गई ,राह में
ख्वाहिशों का बोझ कुछ कम हुआ
राह की सुंदरता तो तब जानी जब ख्वाहिशों का पर्दा हटा आंखों से
संग खड़ा वो हमसफ़र मेरा प्यारा
अनंत ख्वाहिशों को पाने की चाह
अब नहीं थी…
संतोष के सुख से मैं भरपूर थी
मुस्कान चेहरे पर दोनों के थी
संग हो गर हम साथी प्यारा सा
कंटिली राह भी, फूलों सी लगती
मंजिल है हम एक दूजे की
ख्वाहिश हम एक दूजे की
प्रेम हैं हम एक दूजे का

Photo by Osman Rana on Unsplash

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About जयन्ती अखिलेश चतुर्वेदी 17 Articles
नाम--जयन्ती चतुर्वेदी निवास--सनावद , जिला खरगोन शिक्षा--बी एस सी, एम ए हिंदी साहित्य
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