मेरा बसन्त

मेरा बसन्त
Photo by Joel Holland on Unsplash

सुन री सखी
आज आँगन में कागा कांव कांव बोला।
मन हरष उठा,
आएगा कोई अपना प्यारा।
री सखी बता दे कौन है वो।

उसके आने की आहट हवाओं ने दी,
फिज़ाओं ने मानों महक है बिखेरी।
अब तक जो मैं सिकुड़ी-सिमटी रही थी,
आहट पाते ही दिल की कली खिल गई।
बाहर आकर जो देखा मैंने उस तरफ,
बागों बगीचों में भी अब तो बहार आ गई।
तितलियाँ भी सब रँगबिरगी हुई,
भौरे भी मंडराने लगे फूल ऊपर।
उसने आंगन में मेरे कदम जो रखा,
मन में चलने लगी फागुन की बयार।
मैं भी करने चली अपना सोलह सिंगार,
सज लूँ और कर डालूँ अपने रूप का निखार।
बौराने लगी,गुनगुनाने लगी,
उसके स्वागत की तैयारी करने लगी।
रंगों का चयन भी मैं करने लगी,
कौन से रंगों से रंग मैं डालू उसे।
सबसे प्यारा लगा मुझको वासन्ती रंग,
लेके हाथों में, मैं बैठी थामे जिगर।
सखी अब तो बता दे तेरा कौन है कन्त,


री अली, प्यारा नाम है उसका
बसन्त

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About प्रभा शुक्ला 12 Articles
श्रीमती प्रभा शुक्ला , खरगोन , मध्य प्रदेश मैं एक गृहणी हूँ ,बचपन से ही पढ़ना और गीत सुनना मेरा शौक में शामिल रहा है अच्छे साहित्य में रूचि है , कहानी और कवितायेँ लिखती हूँ
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Kavita pagare
Kavita pagare
7 months ago

दीदी बहुत सुंदर बसंत आपके शब्दो से और सुंदर होगया।