मेरा अभिमान मेरा गाँव

गाँव

सादा सा जीवन सादी सी वेशभूषा रहते हैं गाँव में।
हर लहजे में सादगी ,मगर अनपढ़ता नही है मेरे गाँव में।
झिझक है व्यवहार में, मगर फूहड़ता नहीं है मेरे गाँव में।
रिश्तों में सम्मान हैं, अपनो से प्यार है।
कुछ कुछ खट्टी मीठी नोंक झोंक है, मगर कटुता और कुटिलता नही हैं, मेरे गाँव में।
घर के बुजुर्ग बोझ नहीं, घर के मजबूत स्तंभ है।
इसलिये वृद्धाश्रम नहीं है, मेरे गांव में।
अतिथियों का सम्मान है, पड़ोसियों के घर आये मेहमानों का स्वागत भी होता है, मेरे गांव में।
कोई दिखावा नही ,छलावा नही , वास्तविकता झलकती है मेरे गांव में|
सादगी के साथ संस्कार है, भावनाऐं है, स्नेह है और सबसे अहम् इंसानियत हैं मेरे गांव में||

Photo by Abhinav Srivastava on Unsplash

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About कविता प्रमोद पगारे 5 Articles
सौ. कविता प्रमोद पगारे, बलवाड़ा, शिक्षा बी.ए . गृहणी हूँ। साथ ही कल्पनाओं को शब्दों से कतारबद्ध करने शौक रखती हूँ।नये नये व्यंजन बनाना और नृत्य में भी रुची है
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