मेथी का पराठा

मेथी का पराठा

आज मेथी का पराठा
बणाया मन बइण जरा रुकजाे
कांदा, काटयां मन दुई चार
टमाटर भी नाखयां दुई चार
खाेबज लसुण न आदाे
हरी मिर्ची का साथ
जरा साे लाेण वाे भेसक़याे
आन कुंडी मु दचडयाे
दुई चार. वार
खाेबज मन ललचा़य
मेथी काे पराठाे खाणु आज
ठाटी म बेसण न अरू
जुवार काे आट
मेथी कटाेरी ऩाखी
दई चार साथज
मसालाे मिलायाे
कांदा टमाटर न हीग
खुशबुदार
आवु खुबज मिलायाे
आटाे दुई चार वार
घडनs लागी पराठा
चकला पर आज
चूल्हा बालई न
तवाे धऱयाे
तेल काे पाेताे लगायाे
न अलटाे पलट़याे दुई
चार वार संग म कडी
न निबु काे अचार
खाओ बइण प्रीति बइण
मन मेथी का पराठा
बणाया लज्जतदार
अनुराधा सांडले न केतरी
मेहनत करी आज बणाया लज्जतदार
अनुराधा सांडले न केतरी
मेहनत करी आज

Vsigamany, CC BY-SA 4.0, via Wikimedia Commons

और कवितायेँ पढें : शब्दबोध काव्यांजलि

शेयर करें
About श्रीमती अनुराधा सांडले 8 Articles
श्रीमती अनुराधा सांडले खंडवा
2 1 vote
लेख की रेटिंग
guest
0 टिप्पणियां
Inline Feedbacks
View all comments