मोक्ष

भँवरा

आँखें खोलते ही ,नन्हा भँवरा
ऊपर देखता है ,
एक रोशनी उसे बुलाती है
वो उड़ान भरता है ,
ज्यादा ऊँची नही ,,
बस थोड़ा ही ऊपर ,
खुश हो नीचे देखता है ,
घास का हरा समंदर,
इठलाती नदियाँ ,
गर्व से तने पर्वत ,,
पर उसे आकर्षित करते हैं- चटकीले, लाल ,कमल दल !!
ठहरे हुए, ना हिलते ,ना लहराते
मानो टकटकी लगाए उसी की प्रतीक्षा करते हो ,
ललचाता है ,नीचे उतर आता है
पास जा कर देखता है ,,
रोशनी तेज़ होती है ,
उसे पुकारती है !!
अनसुना कर बैठ जाता है ,,
जी भर रस पीता है ,
चिकनी गोल पत्तियों पर खेलता है ,
ठहरे हुए नीले हरे पानी में ,
अपना प्रतिबिंब देख चौंक जाता है ,
छूने की कोशिश में ,फिसलता ,,
गिरता है , धँसता है और धँसता चला जाता है हरे दलदल में!!
तड़पता है, पंख फड़फड़ाता है ,,
पर और धँसता जाता है !!
ऊपर देखता है ,
रोशनी अब भी वहीं है ,
असीम सुनहरी बाहें फैलाए ,,
नन्हा भँवरा हाथ उठाता है ,
और रोशनी समेट ले जाती है
उसे अनंत में। ।।

Photo by Carolien van Oijen on Unsplash

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About वीणा मंडलोई 6 Articles
वीणा मंडलोई शिक्षा - स्नातकोत्तर (वनस्पति शास्त्र) डिप्लोमा -ड्रेस डिजाइनिंग , वोकेशनल ट्रेनिंग-विभिन्न आर्ट्स में । रुचि -हिंदी साहित्य, हस्तशिल्प भावांजली संस्था में सहसचिव के पद पर कार्य करते हुए ,अन्य सामाजिक संगठनों में सक्रिय रूप से भागीदार हूँ । कई सामाजिक समारोह में मंच सज्जा एवं मंच संचालन करती हूँ । कुछ हिंदी पत्र पत्रिकाओ में लेखन प्रकाशित होता रहा है ।
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