नारी ही नारायणी

नारी ही नारायणी

नारी ही नारायणी
जन्म देने वाली जननी
कहीं भी तेरा न हो
अपमान
चाहे न मिले सम्मान

रोज भले ही पूजा
करें न कोई
पर न हो तुझ पर
अत्याचार
मिले न समान अधिकार

पर हो न तेरे हनन
अधिकार
सर्वत्र मिले तुझे
खुला खुशियों का
आसमान।

Image by Suffix from Pixabay

और कवितायेँ पढें : शब्दबोध काव्यांजलि

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About प्रवीणा पगारे 6 Articles
श्रीमती प्रवीण पगारे शाजापुर
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