नन्हीं कली

नन्ही कली

चमन की कली अब फूल
बन गुलशन को महकाएगी
दो घरों की आबरू ले
जीवन के पथ चलकर
मंजिल तय कर जाएगी
मुश्किल कितने भी आ जाए
अपने पग ना डगमगाएगी
शूल बिछे हो फूल बिछे हो
पथ पर बढ़ती नजर आएगी
अपनों से नाता जोड़ चुकी
बेटी धर्म के संग बहू बनके
अपने फर्ज निभाएगी
नन्हीं कली अब फूल बन
गुलशन को महकाएगी

Photo by Bonnie Kittle on Unsplash

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About सरिता अजय साकल्ले 28 Articles
श्रीमती सरिता अजय जी साकल्ले इंदौर मध्य प्रदेश
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