नश्वर है यह काया

नश्वर

यह जीवन नश्वर है पल की खबर नहीं
आज जिए कल गुजरे मौत देती आगाज नहीं

जीते जी इस दुनिया में कुछ ऐसा कर जाए
ना रहे फिर भी सभी के दिल में याद बन बस जाए

कर्म ही जिंदगी है कर्म ही स्वर्ग लोक पहुंचाए
क्या तेरा क्या मेरा सब मृत्यु लोक में रह जाए

नश्वर है यह दुनिया जो आया उसे जाना
कर्म की गठरी साथ रहे जिस लोग को भी जाना

नेकी कर इस जीवन में जो याद बन के रह जाना
इंसानियत के नाम को रोशन कर जाना

यह काया नश्वर है जन्म मृत्यु का फेरा आज
जिए कल गुजरे संग फिर भी दुनिया का झमेला

जिंदगी हर रोज मिलती मौत देती आगाज नहीं
सांसों को मोहताज जिंदगी सुनती आवाज नहीं

मृत्यु है सच्चाई इस बात को ना भुलाना हर पल
खुशियां बांटे जीवन दोबारा ना मिल पाना

नश्वर यह काया पल की खबर नहीं
आज इस लोक में कल परलोक को जाना

Photo by Zac Durant on Unsplash

शेयर करें
About सरिता अजय साकल्ले 28 Articles
श्रीमती सरिता अजय जी साकल्ले इंदौर मध्य प्रदेश
0 0 votes
लेख की रेटिंग
guest
0 टिप्पणियां
Inline Feedbacks
View all comments