पुस्तकें

पुस्तकें मन बहलाती

शीर्षक : पुस्तकें मन बहलाती

पुस्तकों से है, हमारा सबका नाता
पढ़कर पुस्तकें, व्यक्ति ज्ञान पाता।
पुस्तकों को हम सब रखें , सम्भाल,
पुस्तकें है, हमारी भाग्य -विधाता!!

पुस्तकों जैसा नही है, कोई साथी,
पढ़कर बनती है, व्यक्ति की थाती,
पोथी पढ़कर बन गए है, महान,
तुलसी, कबीर, सूर, मीरा की पाती!!

पुस्तकें है, साहित्य का दर्पण,
कवि, लेखकों का इन्हें जीवन अर्पण,
साहित्य सृजन का करो मान,
अन्तर की गाथा, सैकड़ों समर्पण!!

अकेले में पुस्तकें मन बहलाती,
ज्ञान से वैतरणी पार कराती,
ऋषि-मुनियों ने भी ज्ञान पाया,
पुस्तकें सदा, सम्मान है दिलाती!!

गुरुकुल हो या हो, पाठशाला,
पुस्तकों का आश्रय है, निराला,
सब मिल करो पुस्तकों का मान,
पुस्तकें है ज्ञान का, भव्य शिवाला!!

Photo by Tom Hermans on Unsplash

और कवितायेँ पढें : शब्दबोध काव्यांजलि

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About सुषमा शर्मा 6 Articles
श्रीमती सुषमा शर्मा, इंदौर शिक्षा: ओल्ड, जी, डी, सी कॉलेज से स्नातकोत्तर। विधा: लघुकथा लेखन, कहानी, संस्मरण ,कविता आदि, समाचार पत्र में कविता प्रकाशित उपलब्धि: आकाशवाणी भोपाल से 20 वर्ष मालवी लोक गीत गाए व 10 वर्ष तक अवधी भाषा में भी गाए व कई पुरस्कार प्राप्त किए व मंच पर भी कई कार्यक्रम भी दिए। सिलाई -प्रशिक्षण से डिप्लोमा कर, बी.एच.इ .एल .भोपाल की ( वेलफेयर विंग संस्था) में गरीब बच्चों के लिए कपड़े सिल कर बच्चों में निशुल्क बाँटे । मेरी रूचि:संगीत व गायन व साहित्य से भी बहुत लगाव है। अध्यात्म से लगाव है।
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