रक्षा-प्रार्थना

प्रार्थना

क्या अर्वाचीन और क्या प्राचीन
क्या उत्तर और क्या दक्षिण
क्या शासक और क्या आधीन
क्या नगरीय और क्या ग्रामीण
हर क्षण होता प्रकाश क्षीण॥

हाहाकार बढ़ता हर दिन
देव बचाओ मृत्युशैय्याधीन
करते मनन हम प्रतिदिन
विश्व व्याप्त भयङ्कर अंधियारा
महामारी पीड़ित जग सारा
विनय सुनो हे पालनहारा॥

मृत्यु ताण्डव मचा भयङ्‌कर
क्या बाहर और क्या अन्दर
असमञ्जस हर डगर-डगर
अस्पृश्य जीवन की हर लहर॥

कायरता का जाल चढ़ा
स्वार्थ का इस्तेमाल बढ़ा
मनुष्य अपनो से ही चिढ़ा
हाय इतिहास में यह क्या जुड़ा
मनुष्य ही मनुष्यता में पिछड़ा॥

देव करो उद्धार हमारा
दूर करो यह अन्धियारा
समय कठिन यह बीत जाए
तब मन में कुछ चैन आए
यही है प्रार्थना हमारी
विनती सुनो हे गिरधारी॥

Photo by Amaury Gutierrez on Unsplash

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About अंशुमान सिंह ठाकुर 3 Articles
मेरा नाम अंशुमान सिंह ठाकुर है। मैं राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से संगणक अभियांत्रिकी में स्नातक हूं। यूं तो मेरी बहुत सारी चीज़ों में रुचियां हैं परन्तु मुझे लेखन एवं चित्रकला में सबसे अधिक रुचि है। राजनीति, अर्थव्यवस्था तथा धर्म में भी कुछ दिलचस्पी है।
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