ज़िंदगी की उधेड़बुन

ज़िंदगी की सलाइयो में
उनचास फंदे डाले
कुछ उलटे बुने कुछ सीधे
कई बिना बुने उधेड़ डाले
इस उधेड़बुन ने अनजाने ही
कईं पेटर्न बना डाले
कुछ फंदे एक से दूसरी सलाई
पर निकाले
कई सारे ‘एक के दो’
तो कई ‘दो के एक’ कर डाले
सूरज ने भी फिर हँसकर
खूब दिए उजाले
समय ने भी कुछ पल
एफ डी के जमा खाते से निकाले
इमपरफ़ेक्ट सही मगर
एकदो टोपे हमने भी
बना ही डाले।

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About संगीता बर्वे 3 Articles
श्रीमती संगीता बर्वे (प्रमाणित योग शिक्षिका) मेरा नाम संगीता बर्वे है मैं अभी अमेरिका में रहती हूँ, लेकिन मन भारतीय संस्कृति से कूट-कूट कर भरा है।  मुझे बालपन से हि योग विद्या में रुचि होने से मैंने इस विषय में अपनी राह ढूँढना प्रारम्भ की और नियति ने मुझे स्वामी राम देव जी की ओर प्रवाहित किया । उनसे गहन अध्यापन का अवसर मिलते ही मेरे अंतर में यह अलौकिक अनुभव सभी से साझा करने का विचार उत्पन्न हुआ और मैं इसी कार्य में विदेश आनेके बाद भी संलग्न हो गयी और आज तक यह सेवा प्रभु चरणो में अर्पण कर रही हूँ। परमानंद योग शिक्षा केंद्र इंदौर से मैंने योग शिक्षिका का प्रमाणपत्र ग्रहण किया ।
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