अपने-अपने भगवान

अपने भगवान

शीर्षक: अपने अपने भगवान

अंग्रेजी भाषा के शिक्षक दुबे जी का एक बड़ा सपना था

कि रिटायरमेंट के बाद दोनों बहनों के परिवार के साथ एक ज्योतिर्लिंग के दर्शन करें, आज वह सपना पूरा हो रहा है।

बहनों और अपने परिवार के साथ मंदिर के प्रांगण में लाइन में खड़े हुए थे।

चार घंटे सतत खड़े रहने के बाद आखिर उनका नंबर आने वाला था

तभी अचानक दो पुलिस वाले सब लोगों को पीछे करने लगे, दुबे जी भी कुछ सहम गए पर मुश्किल से जगह पाई थी

पीछे होने का मन न हुआ…

“कलेक्टर साहब आ रहे हैं दर्शन करने के लिए, पीछे हो जाइए”

कहते हुए एक रस्सी से सुरक्षा घेरा बनाते हुए दुबे जी समेत और भी कई लोगों को लगभग पीछे धकेल दिया।

कोई कुछ समझ पाता इसके पहले सब ने देखा एक युवक आकर्षक मुस्कान लिए हुए मंदिर प्रांगण में प्रवेश कर रहा है

सारी सुरक्षा व्यवस्था उसके पीछे थी। सभी समझ गए यही है बिल्कुल नया आई.ए.एस।

युवक ने इधर-उधर देखा अचानक उसने सुरक्षा घेरा तोड़ा और सीधे दुबे जी के पास पहुंच गया…

पीछे पीछे सुरक्षाकर्मी आश्चर्य से दौड़े, युवक ने झुक कर दुबे जी के पैर छुए….

दुबे जी अचकचा कर बोले-

“अरे! भई तुम तो कलेक्टर हो।”

“हाँ सर… कलेक्टर ज़रूर हो गया हूँ पर अंग्रेज़ी अभी भी उतनी ही आती है जितनी आपने सिखाई थी।”

दोनों ही जोर से हँस पड़े।

अपने सुरक्षाकर्मी को आवाज देते हुए उस युवक ने कहा

“अब आप लोग सर को दर्शन करवाइये..

मुझे तो अपने भगवान के दर्शन हो गए।”

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Photo by Mor Shani on Unsplash

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About रश्मि स्थापक 2 Articles
रश्मि स्थापक उच्चतर माध्यमिक शिक्षक(हिन्दी) मनपसंद विधाएं- कविता,कहानी, लघु कथा, क्षणिका,लेख और दोहे। साहित्यिक,सांस्कृतिक राज्य स्तरीय गतिविधियों का मंचीय संचालन आकाशवाणी एफ एम पर कंपीयर। आकाशवाणी पर कविताओं और वार्ताओं का समय समय पर प्रसारण। स्थानीय पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का समय-समय पर प्रकाशन ।
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Pawan Jain
Pawan Jain
3 months ago

बहुत बढ़िया कथा, हार्दिक बधाई।