गणेश जी की वार्ता

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एक बूढ़ी अम्मा थी जो व्रत नियम और उपवास करती थी|

एक दिन उसके मन में आया कि क्यों न मैं आज ब्राह्मण ब्राह्मण को खाना खिलाओ, उसकी बहू उसे उसने कहा कि वह मुझे एक ब्राह्मण को खाना खिलाना है|

बहू बहुत क्रोधी और आलसी थी लालची स्वभाव की थी, पर सास ने कहा था तो उसने हां कर दी|

“जी हां आप एक छोटे से ब्राह्मण को खाना खाने का कहना जो ज्यादा खाना ना खाए थोड़ा सा खाएं और चला जाए क्योंकि मैं ज्यादा खाना नहीं बना सकती बनाने में मेहनत भी लगती है और हमारे घर का अन्य भी जाता है इसीलिए”

सासु इतने में खुश हो गई और विचारी एक छोटा सा ब्राह्मण ढूंढें निकल पड़ी बहुत ढूंढने के बाद मंदिर में एक छोटा सा लड़का बैठा था|

उसे उस बूढ़ी अम्मा को देखा और पूछा “आप क्या ढूंढ रही हो” उसने कहा मुझे छोटा सा ब्राह्मण चाहिए खाना खिलाने के लिए, उस बालक ने कहा “मैं चलूं क्या आपके घर खाना खाने”

बुढ़िया खुश हो गई और उसे अपनी गोद में बिठाया और झट से अपने घर की ओर जल्दी से चल दी|

जैसे ही घर पहुंची बहू भी बहुत खुश हूं इतना छोटा ब्राह्मण एक बार के खाने में इसका पेट भर जाएगा खाएगा भी कम अन्य भी बच जाएगा|

उसने उसकी उस ब्राह्मण की थाली लगा दी छोटी सी थाली में थोड़ा थोड़ा सा सब रख दिया|

अब वह तो भगवान थे उन्होंने खाना शुरू किया तो घर का सारा खाना खा गए, अंदर बैठी बहू उस ब्राह्मण और अपनी सास को कोसती रही और मुंह बनाती रही|

उस बुढ़िया ने उसे सब कुछ दे दिया जो जो उसने मांगा अब उस ब्राह्मण ने कहा

“जहां से लाई हूं वहां मुझे वापस छोड़ आओ”

बुढ़िया ने उसे उठाया और मंदिर में छोड़ने चली गई मंदिर में छोड़ दिया और खुद भी वहीं बैठ गई ब्राह्मण ने पूछा घर जाओ अम्मा तो बोली

“बहु बहुत चिल्लाएगी खाना नहीं देगी घर जाकर क्या करोगी, क्योंकि तुम सब कुछ खाकर आ गए हो पूरा खाना बनाया हुआ खा लिया, डब्बे में जो लड्डू मेवे रखे थे वह भी खा लिए|

अब तो वह बहुत नाराज होगी क्योंकि उसे तो छोटा सा ब्राह्मण चाहिए था, यह सुनते ही भगवान ने अपना स्वरूप दिखाया और कहा कि

“जाओ अम्मा मैं तुम्हें वरदान देता हूं कि तुम्हारा घर आंगन धन धान्य से भर जाएगा”

बुढ़िया ने पूछा “वह कैसे”, बोले

“जिस पाठ पर बैठा था वह सोने का हो जाएगा और उसी पाठ के नीचे चार दिशाओं में चार सोने के घड़े निकलेंगे”

यह सुनकर अम्मा चली गई जाते ही बहू ने बहुत खरी-खोटी सुनाई उस पर अम्मा ने बड़े प्यार से समझाया की वो तो भगवान थे|

उन्होंने कहा है कि सोने के चक्र और कलश निकलेंगे तुम्हारे घर|

यह सुनते ही बहू ने घर को खोजना शुरू कर दिया पर कुछ नहीं निकला|

फिर सांस पर हो गुस्सा हुई, सास ने भगवान के हाथ जोड़े और सुरीली और उस पाठ के वहां खोलने लगी सोने का पाठ निकला 4 सोने के घड़े निकले देख कर बहुत खुशी हुई उसने सास को प्रणाम किया और अपनी गलती की माफी मांगी उस बूढ़ी अम्मा ने गणपति जी को कहा प्रणाम करके कहा जिस प्रकार आपने मेरे मनोरथ को पूरा किया सबकी मनोरथ को पूरा करना जिस प्रकार मेरे व्रत में आपने साथ दिया सबका साथ निभाना बोलो गणपति भगवान की जय

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About प्रीति डोंगरे 1 Article
प्रीति डोंगरे एम. ए. (समाज शास्त्र) अच्छे दोस्त बनाना और घूमना फिरना,पार्टी करने का शौक है।
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