गुरु की महानता

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गांव में बच्चों को रोज स्कूल जाते देख किसन बहुत मायूस हो जाता।

उसका भी मन करता वह भी इन बच्चों के साथ स्कूल जाए लेकिन उसकी मां बहुत बुढ़ी हो चूकि थी और स्कूल जाने के लिए नदी पार करनी पड़ती थी । जो किसन के लिए संभव नही था ।

लेकिन एक दिन तो उससे रहा न गया और मां से स्कूल जाने की जिद करने लगा । परेशान होकर मां ने कहा जा तेरे गोपाल काका से कहना नदी पार करवा देगे मां ऐसा बोलकर भूल गई।

लेकिन किसन तो गोपाल काका के पास गया जोर से आवाज लगाने लगा “गोपाल काका कहाँ हो मुझे नदी पार करवा दो , मुझे नदी पार करवा दो”|

किसन बहुत देर तक बैठा रहा और आवाज लगाता रहा ,रोने लगा|

तब एक ग्वाला जंगल से निकल आया और किसन से कहा “क्या बात हैं क्यो रो रहे हो” तब किसन बोला “मैं अपने गोपाल काका को बुला रहा हूँ” ।

वह ग्वाला बोला “मैं ही तेरा गोपाल काका हूँ चल मैं तुझे स्कूल छोड़कर आता हूँ”

उस ग्वाले ने किसन को अपने कंधे पर बैठाया और स्कूल की ओर चल दिया इस तरह किसन भी रोज स्कूल जाने लगा ।

इस तरह रोज गोपाल काका उसे स्कूल से लाने व ले जाने का काम करने लगे|

एक दिन गुरुजी ने छात्रो से कहा कल खीर बनाना हैं सभी बच्चे अपने अपने घर से दूध लेकर आवेगे | किसन ने अपनी माँ से कहा ,’ मेरे गुरुजी ने दूध बुलवाया हैं।’

मां ने फिर कह दिया -“तेरे गोपाल काका से कहना ”

किसन ने गोपाल काका से कहा, उन्होंने एक छोटा सा लोटा भरकर किसन को दे दिया और कहा , ‘ये दूध अपने गुरु जी को
दे देना किसन ।’

उस छोटे लोटे में दूध लेकर खुशी -खुशी गुरुजी के पास गया ।

वहाँ देखा सभो बच्चे बडे़-बड़े बर्तनो मे दूध लेकर आये थे। किसन एक छोटे लोटे मे थोडा़ सा दूध लेकर गया था, इसलिए कोई ध्यान नहीं दे रहा था।

किसन बार-बार गुरुजी से कहने लगा मेरे लोटे का दूध भी खाली कर लिजिए ,परन्तु किसन का छोटा लोटा देख कोई ध्यान नहीं दे रहें थें

बेचारा किसन बहुत परेशान हो रहा था। अंत में गुरुजी ने किसन से लोटा लिया और दूध के बर्तनो को देखा जो बर्तन थोड़ा खाली होगा उसमें यह दूध डाल देते हैं ।

बर्तन में दूध डालकर जैसे ही लोटा सीधा किया लोटा वापस भर गया । ऐसे कितने ही बर्तन भर गये और लोटा सीधा होने पर फिर भरा हुआ ।

यह देख सभी बच्चे व गुरुजी आश्चर्य चकित हो गये । गुरुजी ने किसन से पूछा तुम यह दूध कहाँ से लाए हो, तब किसन ने कहा-‘ यह मेरे गोपाल काका ने मुझे दिया ।’

गुरु जी ने कहा,’ तुम हमे अपने गोपाल काका से मिलवाओगे?’

किसन ने कहा -‘जरुर मिलवाऊगा ,तो चलो अभी चलते हैं सभी ।’ बच्चे व गुरुजी किसन के साथ चल दिए ।

नदी के किनारे जाकर किसन ने आवाज लगाई – “गोपाल काका मेरे गुरुजी आपसे मिलने आए हैं , आप कहाँ हो जल्दी से आ जाओ”

इस तरह बहुत देर तक इन्तजार करते रहे ,परन्तु वहाँ पर कोई नहींं आया ।

गुरुजी किसन पर नाराज होने लगे और कहने लगे “तुम झूठ बोलते हो सच-सच बताओ यह दूध तुम कहाँ से लाए हो”

यह सुनकर किसन घबराकर बोला “मैं सच कह रहा हूँ , मुझे दूध गोपाल काका ने ही दिया “

यह कहते हुए वह रोने लगा ।उसके रोने पर भी वहाँ कोई नहीं आया ।

तब गुरुजी ने किसन को डांटते हुए कहा यहाँ पर तो अभी तक कोई नहींं आया, इतना कहते ही वही ग्वाला वहाँ आ गया |

उसे देखकर किसन खुश हो गया और कहने लगा “ये हैं मेरे गोपाल काका”

फिर गुरुजी ने कहाँ कौन हैं ? कहाँ हैं? हमें तो यहाँ पर कोई गोपाल काका दिखाई नहीं दें रहें हैं ।

किसन ने कहा-‘ यहीं तो खडे़ हैं मेरे पास ‘।

गुरुजी ने कहा -‘हमें तो कोई दिखाई नहीं दे रहा तुम फिर से झूठ बोल रहे हो ।’

तब किसन ने कहा -‘गोपाल काका आप मेरे गुरुजी को भी दिखाई दो वर्ना वे मुझे गलत हो मानेगें ।

इस तरह किसन कि जिद पर सिर पर मोर मुकुट , हाथ में बाँसूरी लेकर भगवान स्वयं प्रगट हुए और सबको दर्शन दिए ।

यह देख किसन भावुक हुआ ,तथा गुरुजी व भगवान कृष्ण की परिक्रमा करते हुए कहने लगा ,

“गुरु गोविन्द दोऊ खडे़ काके लागू पाय ,”
बलिहारी गुरु आपकीे गोविन्द दियो बताय”।

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