सफर

जिंदगी का सफर

कितनी मन्नत और जतन के बाद भगवान ने बच्चे का मुँह दिखाया।

कितनी ग़रीबी से बड़ा किया अब बेटा बैंक ऑफिसर है।

बहु पोते सब के साथ जिंदगी का सफर जो बाकी बचा है आराम से कटेगा।

निखिल की मां कि तन्द्रा भंग हुई रिक्शे के रुकने पर तो लगा छोटा सा सफर था,

बेटे के घर से पास है वृद्धाश्रम। फिर इतना लंबा क्यों लगा?

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Image by Mikes-Photography from Pixabay

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About दामिनी पगारे 5 Articles
मैं श्रीमती दामिनी सुनील पगारे एम. ए.(राजनीति शास्त्र) बड़वाह जिला-खरगोन(M.P.) लगभग बाईस साल से स्वान्तःसुखाय लिख रही हूं। माता पिता के आशीर्वाद ,सभी परिजनों के प्रोत्साहन और अन्य सभी स्वजन के स्नेहाशीष, सद्भावनाओं से सोशल मीडिया पर अपनी पहचान बना पाई।
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