डर

पिता का डर

“ये क्या किया शंकर तुमने,

मकान बेचकर तीस लाख बेटे के हाथ में रख दिए! इतना भरोसा ठीक नहीं औलाद पे ।”

दोस्तो की बातें याद आ रही थी

आज भी बेटे ने नए मकान का सौदा नहीं किया,

पूछने पर बोला “मुझे तो लोन मिलेगा नहीं, और सीमा के लोन में वक़्त लगेगा।”

शंकर आंखो में आंसू भर अखबार पढ़ने का अभिनय करते रहे थे।

पंद्रह दिन में नया मकान लेने की बात की थी, आज दो महीने हो गए ।

आज उन्होंने कहा “वो जो पहले देखा था वो क्यों नहीं नक्की करते हो, अच्छा था वो तो?”

“हाँ बाबूजी वो अच्छा था पर, वहाँ आसपास मंदिर नहीं दुकान नहीं चौराहा पार करना पड़ता।

अभी जो देख रहे हैं वो बहुत अच्छा है ,

आपके और माँ के लिए, मन्दिर दुकान गार्डन सब पास में ही है,

सीमा और मुझे बहुत पसन्द आया,

आपको कोई असुविधा नहीं होगी।”

सुनकर शंकर की आँखों से आंसू बहने लगे,

आशीर्वाद देते हुए बोले

“तुम पर पूरा भरोसा है, तुम्हारे रहते मुझे कोई चिंता नहीं ।”

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Photo by Abhay Singh on Unsplash

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About सुषमा चौरे 7 Articles
मैं सुषमा चौरे इंदौर से, शिक्षा राजनीति शास्त्र में एम ए किया है। देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी से योग डिप्लोमा । 25 साल शिक्षण कार्य किया है। साहित्य में रुचि है पढ़ने और लिखने का शौक है। नियम नहीं जानती को मन में आता है लिख लेती हूं।
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