ममत्व

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अरे! सीमा आप। बहुत दिनों बाद आना हुआ। क्या बात है आज आपके चेहरे पर चमक दिखाई दे रही है।

सीमा ने मेरे हाथ में शादी का कार्ड थमाते हुए कहा –

“लवेश की शादी है।”

शादी लवेश की… लेकिन लवेश तो…

बीच में ही सीमा ने बात काटते हुए कहा,

“हाँ वो परिवार और समाज के लिए शादी करना चाहता है”।

मैं उनका चेहरा देखती ही रह गई वे बोली जा रही थी।

“मैं मेरे बेटे के घर गई थी जहां वह उस लड़की के साथ चार साल से रह रहा था। मैंने दिल पर पत्थर रखकर उसे माफ़ कर दिया।”

उनकी आँखों में आसूँ थे।

“मैं हार गई अपने बेटे के आगे।”

मैं अवाक सा उनका चेहरा देखती जा रही थी। कुछ समझ में नहीं आ रहा था क्या बोलूं।

कैसे एक माँ बच्चों के लिए दुनिया से लड़ सकती है, बच्चों से नहीं।

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About डॉ. विजया त्रिवेदी 6 Articles
नाम- डॉ. विजया त्रिवेदी शिक्षा- एम.ए. (हिन्दी साहित्य), एम.फिल., पी.एच.डी (हिन्दी साहित्य - लगुकथाओं) विशेष- आकाशवाणी में कम्पेयरिंग, वार्ता, परिचर्चा, यववाणी कार्यक्रम (शिवपरी. म.प्र.) सर्वब्राहमण सहकारी समिति- संचालक शुभांकन पब्लिक स्कूल- उपाध्यक्ष क्षितिज संस्था मंच सदस्य
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