लगाव

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शीर्षक: लगाव

सुशीला अपने बीमार बेटे मिन्टू के साथ अस्पताल से घर आ रही थी

रास्ते मे मिन्टू ने अपनी मां से उत्सुकता से पूछा-

‘माँ आप मुझे और दीदी को कितना प्यार करती हो।
बाजू वाली आंटी अपने दोनों बच्चों में अंतर रखती हैं।
बेटे और बेटी में भेदभाव है करते हैं क्या वो लोग ?’

बारह वर्षीय मिन्टू ने अपनी माँ से कहा।

माँ ने समझाया –
‘नही बेटा माँ कभी अपने बच्चों में अंतर नही करती। उनका बेटा कमजोर है इसलिए माँ ज्यादा देखभाल करती है, कमजोर सन्तान से ज्यादा लगाव हो जाता है । ‘

‘अच्छा माँ !
मैंने कहीं पढ़ा कि कोरोना में कमजोर लोगों को ज़्यादा खतरा है । मैं प्रार्थना करूंगा कि भगवान कमजोर लोगों पर ज़्यादा ध्यान रखे। हम सबकी रक्षा तो वो करेंगे क्योंकि वो भी भेदभाव नही करते ना।
मुझे सब सुन सुन कर बहुत चिंता होती है। भगवान जल्दी से कोरोना मुक्त संसार कर दे।’

‘वैसे मेरी रिपोर्ट तो अच्छी आएगी ना?’ बोलकर मिन्टू कुछ उदास होने लगा।

सुशीला ने हाँ कहकर उसे खींचकर अपने आँचल से चिपका लिया।

-दामिनी पगारे

Image by Free-Photos from Pixabay

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मैं श्रीमती दामिनी सुनील पगारे एम. ए.(राजनीति शास्त्र) बड़वाह जिला-खरगोन(M.P.) लगभग बाईस साल से स्वान्तःसुखाय लिख रही हूं। माता पिता के आशीर्वाद ,सभी परिजनों के प्रोत्साहन और अन्य सभी स्वजन के स्नेहाशीष, सद्भावनाओं से सोशल मीडिया पर अपनी पहचान बना पाई।
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