सवाया

शगुन

तनु ने निमंत्रण पत्रिका माँ-बाबूजी को दी और पैर छुए ।बेटी की शादी में आने की मनुहार की।
माँ बाबूजी दोनों गदगद हो रहे थे, नातिन की शादी जो थी ।
“तनु तुमने छोटे को दी निमंत्रण पत्रिका “माँ ने उत्सुकता से पूछा।

“हाँ हाँ !!माँ गई थी पिछले हफ्ते । मनुहार पत्र और निमंत्रण पत्र दोनों दिए , अच्छे से डिज़ाइनर बैग बनवाए थे !!पत्रिका के। वी आइ पी जो है ,मेरा भाई ,तो न्यौता भी तो खास होना चाहिए। इतना बड़ा अफसर भाई आएगा तो ससुराल और नए समधियों में हमारा भी तो मान बढ़ेगा !अरे !!उसके आने से तो शान बढ़ेगी शादी की । गर्व से तनु कुछ तन सी रही थी ।

“लो बड़े भैया भी आ गए ” ।
बड़े भैया – – साधारण से अकाउंटेंट। किसी तरह अपने तीन चार प्रमोशन रोके हुए थे ।प्रमोशन यानी ट्रांसफर ।और अगर यहाँ से गए तो माँ बाबूजी को कौन संभालेगा।और बाबूजी तो अपना घर छोड़ कर जाएंगे नहीं कहीं । तो भैया भाभी, सालों से यहीं हैं माँ बाबूजी के साथ ।
“भैया आप बाबूजी को ए सी टैक्सी में लाना !बेवजह थकान ना हो रास्ते में ,, वरना पूरी शादी का मज़ा नहीं ले पाएंगे। नया जोधपुरी सूट भी बनवा दो, इनके लिए और माँ के लिए भी कुछ दो तीन साड़ियां ले लेना, रिसेप्शन के लिए तो अच्छी ही लेना ।” तनु ने सलाह कम हिदायतें ज्यादा दीं ।
आरती भाभी को मामेरा की लम्बी फेरहिस्त थमा कर ,खा – पी कर तनु रवाना हो गई ।
तनु कुल मिला चार घंटे रूकी होगी ,ढेरों बातें की शादी की सारी प्लानिंग बताई ।समधियों की शान शौकत ,, रिश्तेदारों के नखरे सब बखाने।
आरती राह देखती रही ,एक बार को जीजी कह दें कि बड़े भैया भाभी !आप को भी निमंत्रण है, हमारी तरफ से ।
लेकिन जो पत्रिका पर बाबूजी का नाम और सपरिवार लिखा है , हम तो उसी में शामिल है। न कोई मान न मनुहार।
साड़ियों की पैकिंग में ब्लाउज़ पीस और नारियल पर सिक्का रखते आरती को अपने सवाया पन का एहसास हो रहा था ,,
जैसे शगुन के सौ रुपये पर एक का सिक्का हो —उसकी कीमत कुछ नहीं और उसके बिना अधूरे भी ।

Photo by Jayesh Jalodara on Unsplash

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About वीणा मंडलोई 6 Articles
वीणा मंडलोई शिक्षा - स्नातकोत्तर (वनस्पति शास्त्र) डिप्लोमा -ड्रेस डिजाइनिंग , वोकेशनल ट्रेनिंग-विभिन्न आर्ट्स में । रुचि -हिंदी साहित्य, हस्तशिल्प भावांजली संस्था में सहसचिव के पद पर कार्य करते हुए ,अन्य सामाजिक संगठनों में सक्रिय रूप से भागीदार हूँ । कई सामाजिक समारोह में मंच सज्जा एवं मंच संचालन करती हूँ । कुछ हिंदी पत्र पत्रिकाओ में लेखन प्रकाशित होता रहा है ।
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Kavita pagare
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9 months ago

बहुत बढिया रचना