विपन्न तिथियाँ

उम्र और किस्मत

उम्र और किस्मत :

कितनी बार कहा मैंने की मेरे साथ चलो लेकिन तुम फिर भी पीछे रह गई ! मुझे देखो मैं तुमसे कितनी आगे निकल आई हूँ!”

उम्र ने किस्मत को अभिमान से कहा ।

“हाँ ! सब जानती हूँ मैं !

समय हमेशा तुम्हारे साथ रहा है और मेरे साथ जिम्मेदारियों का बोझ भला मैं तुम्हारे साथ कैसे चल सकती हूँ !”

किस्मत भी बोलने में कहा पीछे रहने वाली थी। “

दोनों की बातें सुन रहा समय दौड़ कर आया उम्र और किस्मत के कंधे पर हाथ रख कर कहने लगा, “

जब जागो तभी सवेरा हम एक साथ चलने की एक कोशिश तो कर ही सकते हैं ! ”

और मुस्कुरा कर तीनों निकल पड़ते हैं, मंजिल की तलाश में..!

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Photo by Aron Visuals on Unsplash

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About सविता उपाध्याय 2 Articles
श्रीमती सविता उपाध्याय "सरिता" शिक्षा - एम. ए. हिन्दी साहित्य विधा - लघुकथा लेखन हिन्दी व निमाड़ी गीत भजन गायिका सम्प्रति- गृहिणी ग्राम - गुलावड़, तह. महेश्वर जिला - खरगोन
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