अनुशासन और स्वरचित रचनाएं

बच्चें अनुशासन सदैव अपने बड़ों से सीखते हैं।घर के माहौल और बड़ों की दिनचर्या का बच्चों पर बड़ा गहरा प्रभाव पड़ता है। माता पिता द्वारा अनुशासित रखने को बच्चें कभी कभी ग़लत भी समझ जाते हैं।

अनुशासन का सही अर्थ और उससे हमारे व्यक्तित्व पर पड़ने वाले प्रभाव को हम बहुत बाद में समझ पाते हैं। अनुशासन में रहने वाले व्यक्ति हर कार्य को समय पर करते हैं।

समय का पाबंद और समय का सदुपयोग करने वाला व्यक्ति अवश्य ही सफलता की सीढ़ियां आसानी से चढ़ता जाता है। कठिनतम कार्य को भी करने में सक्षम होता हैं। सबकी नजरों में एक विश्वसनीय और सम्माननीय स्थान पाने में सफल रहता हैं।

स्वरचित कोई भी रचना हो वह रचनाकार को प्रिय होती हैं। क्योंकि उस रचना के सृजन के पहले उसके मन में कई दिनों तक मंथन चलता है, फिर जो अम्रततुल्य भाव ऊपजते हैं उसी को वह अपनी लेखनी से शब्द रुप देकर सृजन करता है।

इतनी मेहनत और मनन के उपरांत बनी रचना को कोई अपने नाम से प्रेषित करें, तो ये बड़ी दुखदायी बात होती हैं, सृजनकर्ता के लिए। ये तो वहीं बात हुई की कोई दूसरे की संतान को अपनी संतान बताकर पहचान करवायें।

यह कितनी शर्मनाक हरकत हैं, इससे कोई कुछ पाता तो नहीं परंतु किसी और से बहुत कुछ छीन लेता हैं।
ऐसा कर, चोरी का पाप करने से बचना चाहिए, क्योंकि किसी की आत्मा को दुखाने से बूरा और कोई कृत्य नहीं।

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About जयन्ती अखिलेश चतुर्वेदी 17 Articles
नाम--जयन्ती चतुर्वेदी निवास--सनावद , जिला खरगोन शिक्षा--बी एस सी, एम ए हिंदी साहित्य
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