बांसुरी की धुन

बांसुरी वाला


बांसुरी बेचने वाला बांसुरी बजाता हुआ सड़क पर चला जा रहा था।

उसकी बांसुरी में इतनी अच्छी धुन निकल रही थी।

मानो हमारा मन ही बहुत सारी खुशियो से भर गया हो ।

वह बांसुरी बजाने वाला बांसुरी को बेचकर ही अपना घर चला रहा था।

बांसुरी वाला जब भी आता था बहुत अच्छी धुन अपनी बांसुरी से निकालता था मन खुश हो जाता था ।

बांसुरी में बहुत मीठे स्वर थे जिसे सुनकर मन को शांति मिलती थी।

जब भी बांसुरी वाला आता था सभी लोग घरों से बाहर निकल बांसुरी सुनने के लिए खड़े हो जाते थे ।

उसकी बांसुरी सुनकर बहुत अच्छा लगता था

अगर वह गरीब ना होता तो शायद एक काबिल इंसान होता।

लेकिन गरीबी के कारण उसे यह काम करना पड़ रहा था।

कुछ लोग जीवन में इसलिए कामयाब नही हो पाते ।

और सही रास्ता नहीं चुन पाते उनकी मजबूरीया उन्हें आगे बढ़ने नहीं देती

जिस इंसान के पास बहुत सारी जिम्मेदारी होती है।

वह उन्ही को निभाने में अपना समय व्यतीत कर देता और आगे नहीं बढ़ पाता |

इसलिए जीवन में आगे बढ़ने के लिए कुछ परेशानियाें को साथ में रखकर हमें आगे बढ़ना चाहिए ।

क्योकि हो सकता है कि कामयाबी हमारा इंतजार कर रही हो ।

Photo by Jyotirmoy Gupta on Unsplash

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About सुषमा बर्वे 1 Article
मैं सुषमा बलिरामजी बर्वे (मूल निवासी कोदलाखेडी त.महेश्वर ) खरगोन शिक्षा -समाजशास्त्र एवं हिन्दी लिटरेचर में पोस्ट ग्रेजुएशन सिलाई डिप्लोमा मेरी रूचि कढ़ाई बुनाई सिंगिंग लेखन में रूचि
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