दूसरों से अपेक्षा क्यों

अपेक्षा

क्यों नेहा तूने उस दिन मीनू से बात नही की वह मुझे बोल रही थी।
बुआ मिलते से मुझसे मेरी ही शिकायत करने लगी । मीनू उनकी बहू जिसने मेरी शिकायत अपनी सास की —–

अरे सुनो आज बाजार में संगीता दिखी थी उसने मुझे नजरअंदाज कर मुझसे बात नहीं की मैंने भी नहीं की ——–

देखो वो कभी अपने से फोन पर बात नही करते फिर हम भी क्यों करें —

ऊपर लिखें कुछ दृष्टांत बातचीत में कहने सुनने में आते हैं ।
हम अक्सर सामने वाले से अपेक्षा करते हैं की पहल वो करें और वो पूरी नही होती तब हम उसके बारे में बातें करने लगते हैं ।

पहला किस्सा बुआ अपनी भतीजी से अपनी बहू से बात नही करने की शिकायत करती हैं , किन्तु क्या उन्होंने अपनी बहू से पूछा की अगर उसने बात नही की तो तुमने क्यों नही की वह तुम्हारी ननद थी तुमने जाकर मिलना था बात करना था शायद उसका ध्यान तुम्हारे ऊपर नही गया होगा ।

दूसरे किस्से भी यहीं अगर तुमने बाजार में देख लिया था तो तुम ही बोल लेते या बोल लेती ।

वैसे ही तीसरा किस्सा अगर वें किसी कारण से फोन नही करते तो तुम कर लो ।

जब हम अपेक्षा सामने वाले से करते हैं तो सामने वाला भी आपसे किसी बात की अपेक्षा करता होगा या करती होंगी।

जब आप भी वही कर रहे हो जो सामने वाला कर रहा हैं फिर शिकायत किस बात की , इससे तो यही साबित होता हैं की आपके मन में सामने वाले के प्रति अच्छे भाव नही है या तो आप उससे ईर्ष्या करते हो या आपका अहंकार आपके सामने आता है या आप अपने आप को उससे श्रेष्ट समझते हो ।

किसी की शिकायत करने से पहले अपने अंदर भी झाँक कर देखो।

इस तरह के किस्सों से तो यही लगता है की आपका व्यवहार आपके मन को कचोटता है एवं उसी को समझाने के लिए आप इस तरह बात कर अपने आप को सही साबित करना चाहते हो पर कहीं न कहीं आपके मन में बैठा चोर आपको जरूर धिक्कारता हैं पर समझ नहीं पाते हो ।

इसलिए अगर कोई अपने वाला मिल जाये तो उससे दो बातें कर लो मुस्कुरा दो निश्चित ही अगली बार वह भी आपसे मिलकर खुश होगा ।

किसी ने आप से फोन पर बात नहीं की और आपको उससे अपेक्षा है तो आप ही बात कर लो शायद उससे व्यस्तता के कारण या किसी और वजह से आपसे बात नही की हो आप कर सकते हो मुँह फुला कर बैठने से तो दुःख ही होना है ।

व्यवहार में सरलता , सहजता होंगी तो आप के साथ आपके अपने भी खुश होंगे । किसी से कोई शिकायत नही होगी जीवन सुखमय होगा।

Photo by Jan Tinneberg on Unsplash

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About मञ्जुला शर्मा 5 Articles
श्रीमति मञ्जुला शर्मा शिक्षा B.A. गृहणी हूँ , पिताजी स्व. श्री बैजनाथ जी जोशी हिंदी साहित्य के व्याख्याता थे मेरी साहित्य में रूचि है कहानी कविताएं लिखना और पढ़ने का शौक है.
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Akhilesh Joshi
Akhilesh Joshi
7 months ago

बहुत ही सुन्दर विवेचना।