मैडम रीतादास

शिक्षिका

अंग्रेजी की शिक्षिका, एक सामान्य महिला, दिखने में तो उनका कद सामान्य था, रंग गेहुँआ।

वे प्रतिदिन स्कूल आती थी।

हा . से. कक्षाओं में अंग्रेजी विषय का अध्यापन कार्य करती थीं I

पी . एस. सी. पास करके ही उनकी शिक्षा विभाग में नियुक्ति हुई थी।

शाला में प्रभारी प्राचार्य थीं।

बातों से पता चला कि उनके दो बच्चे भी हैं। वे किसी से भी अधिक बात नहीं करती थी मितभाषी थीं।

वे चौहान परिवार की बेटी थी| लगता था वे हिन्दू थी लेकिन विवाह किसी ईसाई से किया था।

वे पढ़ाई के लिये शहर आ गई थी। अतः वे अकेली रहकर पढ़ाई कर रही थी।

पड़ोस में रहने वाले सिंचाई विभाग के बाबू से जान पहचान हो गई थी।

मैडम पढ़ाई के साथ कोचिंग भी करती थी। कमाई अच्छी थी अब उनकी शिक्षिका की नौकरी भी लग गई थी।

पढ़ी लिखी व सरकारी नौकरी देखकर बाबू ने उनसे ब्याह रचा लिया और उनके साथ रहने लगा दो बच्चों का जन्म हुआ |

तब तक उसे मैडम की कमाई और जमा पूँजी का अंदाजा हो गया था।

पत्नी सामान्यतः पति के सामने खुल जाती है वह उसपर विश्वास करके उसके सामने अपने सारे राज खोल देती है।

पति ने अंदाजा लगा लिया था कि अब रीता के पास काफी पैसा जमा हो चुका है।

उसने अपना जाल फैलाना शुरू कर दिया।

उसने शिक्षिका मैडम के नाम से बहुत सारा कर्ज ले लिया|

उसने पत्नी को बतलाया कि जबलपुर में उसका प्लाट है वहां मकान बनाना है, और हम सभी वहीं रहेंगे ।

रीता मान गई |

जैसा पति बोलता गया, उसने अपनी सारी जमा रकम निकाल कर दे दी।

अपने माता पिता से मिलकर आना है यह बोलकर वह चला गया और फिर वह लौटकर वापस नहीं आया।

रीता मैडम ने कई महीने तक उसका इंतजार किया, वह नहीं आया तब मैडम का माथा ठनका उस समय फोन भी नहीं होते थे। उसे ज्ञात हो गया कि वह ठगी गई है।

उन्होंने चर्च के फादर को बतलाया और अपने पति की फोटो बतलाई कि इन्हें जानते हो या किसी अन्य चर्च में देखा है तो बतावें|

फादर ने आश्वासन दिया कि वे अवश्य उनकी मदद करेंगे। फादर दूसरे शहरों के चर्च में भी जाते थे।

अतः उन्होंने पता लगा लिया कि वह फरेबी बाबू जबलपुर में रहता है और वहां उसका अपना परिवार भी है।

उसने तुम्हें ठगा है।

एक दिन शिक्षिका मैडम ने फादर के साथ मिलकर उसे तलाक के कागज भेज दिये लगभग दो साल में उनका तलाक हो गया।

इस बीच कर्ज वापस लेने वाले अपना पैसा मांगने लगे और मैडम को परेशान करने लगे।

अब मैडम कई कई दिन तक स्कूल में अनुपस्थित रहने लगी लोग अक्सर आकर पूछते मैडम आई हैं क्या?

वे कब और कहाँ मिल सकती हैं।

कभी कभी तो पुलिस वाले भी आकर पूछते कि मैडम का चेक बाउंस हो गया है। उन्हें अरेस्ट करना है।

प्रिंसिपल व्यवहार कुशल थे |

वे पुलिस वालों को बातों में उलझाकर मैडम को किसी अन्य शिक्षिका के साथ घर भेज देते और पुलिस को बतलाते कि वे अवकाश पर है|

एक दिन मैडम ने बातों में बतलाया कि जिस फादर ने उनकी मदद की है वे उन्हें और उनके बच्चों को अपनाना चाहते हैं।

लेकिन उनके मन में भय व्याप्त हो गया था।

कि फिर से धोखा नहीं मिले ऐसी गलती मैं दोबारा नहीं करना चाहती मेरे जीवन की सबसे बड़ी गलती थी।

कुछ समय बाद एक दिन रीता मैडम अचानक गायब हुई तो फिर कभी नहीं आई।

प्राचार्य ने बहुत तलाश कराई न उनके घर का पता और न ही मैडम का पता नहीं किस गुमनामी के अंधेरे में खो गई थी ।

शासकीय सेवा में नियम है कि कर्मचारी जब तक आवेदन नहीं देता तब तक उसकी सेवाएँ समाप्त नहीं की जाती है।

उनका नाम कई सालों तक शाला के उपस्थिति रजिस्टर में लिखा जाता रहा।

शिक्षिका का नाम- रीता दास
पद वरिष्ठ व्याख्याता एवं प्रभारी प्राचार्य
शैक्षणिक योग्यता _ एम ए एम एड पी एच डी
विषय अंग्रेजी

Photo by Nikhita S on Unsplash

और संस्मरण के लिए देखें: शब्दबोध संस्मरण

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About मनोरमा सकरगायें 3 Articles
नाम: मनोरमा सकरगायें जन्म स्थान: इन्दौर शिक्षा: एम ए ( हिन्दी साहित्य ) व्यवसाय : सेवानिवृत शिक्षक
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