शब्द

शब्द में ही

शब्द में ही ओंकार का वास है
हर शब्द में उस ईश्वर का वास है
मंदिर में गुंजित मंत्रों की पावन तान है
शब्द में ही बसती गुरु की अरदास है
शब्द ही जीवन को रसों से रस-धार करे
शब्द ही अलंकारों से हर पल शृंगार करे
शब्द फूलों-सा जीवन को कुसुमित करती
शब्द ही क्षण भर में जीवन राग सुनाती
शब्द में ही करुणा की धार बहे
शब्द में ही भावों की रस-धार बहे
शब्द ही कभी अमृत का पान कराये
शब्द ही विष बन जीवन का संहार कराये
शब्द ही दु:ख-सुख के मौसम बन जाते
शब्द ही गीता बन कर्म का पाठ पढ़ाते
शब्द ही आपस में मेल कराते
शब्द ही लोगों में क्षण भर में बैर कराते
शब्द है तो जीवन की हर अभिव्यक्ति है
शब्द के बिना जीवन बिल्कुल विरक्त है
वेद, पुराण, गीता, कुरान, बाइबिल की शान है
इसमें गुरबानि और पैगम्बर की अजान है
शब्द में ही पांचाली की करुण पुकार है
शब्द में ही सीता का जीवन-परित्याग है
शब्द में ही ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का सार है
शब्द में ही समाया सतरंगी यह संसार है

कहानियां भी पढ़ें : लघुकथा

Photo by Florian Klauer on Unsplash

शेयर करें
About डॉ. आशा शरण 4 Articles
डॉ.आशा शरण, खंडवा शिक्षा: एम.ए.हिंदी,संस्कृत,समाजशास्त्र,राजनीतिशास्त्र,पीएच.डी., नेट,बी.एड.,पी.जी.डी.सी.ए. रुचि: लेखन, संगीत सुनना, सामाजिक कार्य में संलग्न रहना, हिन्दी काव्य कोश, कविता कोश और मीन गूंज में कविता प्रकाशित
0 0 votes
लेख की रेटिंग
guest
0 टिप्पणियां
Inline Feedbacks
View all comments